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लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ Day 2

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मैं प्रेम रावत!

तो पता है ये वीडियोज़ इसलिए बना रहा हूँ ताकि जैसे भी हो सके आप लोगों की मदद कर सकूँ। क्योंकि लॉकडाउन है, कोरोना वायरस लगभग हर जगह फैला हुआ है और मुझे लगा यह कमाल का मौका है विचारों के आदान-प्रदान का। कुछ विचार जो मेरे मन में आये।

और जब आप देखते हैं परिस्थिति को — मेरा मतलब यह कहना कि संकट है, मुझे नहीं लगता इसमें कुछ गलत होगा। और यह कोरोना वायरस तो बढ़ता और बढ़ता और बढ़ता ही जा रहा है। अब यह चाइना में जहां से शुरू हुआ, उन्होंने इस पर ज्यादा नियंत्रण पा लिया है। लेकिन, बाकी जगहों पर यह अब भी बढ़ता जा रहा है और यह कहाँ जाकर रुकेगा, यह कोई नहीं जानता।

मेरा मतलब है, मैं क्या कहूँ जिससे कि मदद मिलेगी ? तो मैं कल रात सोच रहा था, और वो एक बात जो मन में आयी। (सबसे पहले, दरअसल) वह थी कि यह पहली बार नहीं हो रहा है। इंसानियत पहले भी संकटों से जूझ चुकी है और जब आप सोचें ऐसी चीजें हुई हैं, जो बहुत ही बुरी थीं, पर किसी तरह हम इकट्ठा हुए और अपनी हिम्मत को समेटा।

इसलिए मैं यह बात कहना चाहता हूँ। बात यह नहीं कि हमारे सामने क्या है, पर फर्क़ इससे पड़ेगा कि सामना कैसे करेंगे हम इस चीज का — चाहे कुछ अच्छा हो, जो हमें तोहफे में मिला हो या कुछ बुरा, जैसे कि अब यह कोरोना वायरस।

एक तरह से दो चीजें हो रही हैं — एक है आपका जीवन, आपका अस्तित्व और यह एक तोहफा है जो आपको मिला है। और बिलकुल दूसरी चीज है, (जो भी छोड़िये अब, मैं उसमें नहीं पड़ने वाला हूँ), पर हमारे सामने यह वायरस है, लोग जो भी बातें कर रहे हैं और जैसी भी कहें — ये लोगों को डराता है और एक तरह से ये सही भी है, वो डर गए हैं।

पर, यह वह नहीं जो आपके सामने है। पर “आप कैसे सामना करेंगे इसका, आप कैसे संभालेंगे इसको!” तो सबसे पहले मेरे दिमाग में राम की कहानी आती है। उनके राज्याभिषेक के दिन सभी लोग बहुत खुश थे। वह खुश थे; उनकी पत्नी उत्साहित थीं; उनके पिता खुश थे; उनकी माँ खुश थीं और यह राज्याभिषेक होने ही वाला था।

अयोध्या के सभी निवासी (इंडिया में एक जगह), उन्हें बहुत ख़ुशी है कि राम राजा बनने वाले हैं। वह एक अच्छे राजा बनेंगे — वह बहुत पढ़े-लिखे हैं, नौजवान हैं!

उनके पास सबकुछ है और उसी दिन जब उन्हें राजा बनाया जाने वाला है, उनकी दूसरी माँ, उनकी सौतेली माँ, उन्हें कुछ वचन मिले थे जो इस्तेमाल नहीं हुए थे — तो उन्होंने (मुझे लगता है मैं ठीक कह रहा हूँ।) वह राजा के पास गयीं और कहा कि “देखिये, याद है वो वचन जो मुझे दिए गए थे ? अब मैं क्या चाहती हूँ कि इस राज्याभिषेक को रोक दीजिये। मैं चाहती हूँ कि आप राम को राजा नहीं, पर मेरे बेटे भरत को राजा बनाइए। और मैं चाहती हूँ कि आप राम को चौदह वर्षों के वनवास पर भेज दें — वनवास दे दें उसे ।”

फिर आप सोच सकते है, सभी इतना खुश हैं, फिर सभी लोग कहने लगे, “हां, यह अच्छा होने वाला है — और फिर अचानक से उस ख़ुशी और उत्सुकता के बीच में ही अचानक कुछ और हो जाता है।

इस बात से पिता को बहुत ठेस पहुंची, क्योंकि वह चाहते थे कि राम ही राजा बन जाएँ। राम की माता जी को यह अच्छा नहीं लगा। लेकिन राम ने जानकर क्या कहा ? सीता को यह कैसा लगा ? लक्ष्मण को कैसा लगा ? वह राजा की तीसरी पत्नी से बेटे थे; लक्ष्मण और शत्रुघ्न, ये जुड़वां, भरत कैकेयी से हुए थे और फिर राम थे सबसे बड़े, सबसे बड़े बेटे।

तो लक्ष्मण ने राम को कह दिया; “हम अलग नहीं होंगे! मैं आपके साथ ही आऊंगा चाहे अच्छा लगे या नहीं!” सीता जी ने कहा, “मैं आपकी पत्नी हूँ, मुझे कोई फर्क़ नहीं पड़ता। मेरा स्थान आपके साथ है। इस महल में नहीं है, मैंने महल से विवाह नहीं किया। मैंने आपसे विवाह किया है। तो मैं साथ में चलूंगी आपके।”

अगर बस एक मिनट के लिए भी आप सोचें सकें कि, “हे भगवान! सभी लोग एक कमाल की बात के लिए इतने खुश हैं” — फिर ये संकट आ जाता है। यह अजीब सी बात हो जाती है।

तो उनके पिता राम को बुलाते हैं और कहते हैं, “तुम्हें ऐसा करना है!” और राम कहते हैं, “जी हां! मैं यही करूँगा, कोई दिक्कत नहीं है। ठीक है, मैं राजा बनने वाला था, क्योंकि आप चाहते थे कि मैं राजा बनूँ और अब आप चाहते हैं कि मैं वनवास में जाऊं और राजा ना बनूँ। जो आप कहें, जैसी आपकी इच्छा, जो भी आप कहें!”

तो कहानी की गहराई में जाये बिना, (क्योंकि कहानी बहुत ही सुन्दर है) मुद्दा यह बन जाता है कि आपको कैसे बातों को संभालना है, यह नहीं कि परिस्थिति क्या है ? “उस समय क्या करते हैं आप ?” आप अपने जीवन के साथ क्या करते हैं ? आप इस इंसानी अस्तित्व के साथ क्या करते हैं, जो आपको मिला है।

आप इस धरती के साथ क्या करते हैं; आप इन पेड़ों के साथ क्या करते हैं; आप नदियों के साथ क्या करते हैं; आप समुद्र के साथ क्या करते हैं; आप हवा के साथ क्या करते हैं; आप प्रकृति के साथ क्या करते हैं; इन सब चीजों के साथ जो आपको मिली हैं; ये सब जो हमारे पास हैं — आप इनके साथ क्या करते हैं ?

हम विनाश कर सकते हैं — हम समय बर्बाद कर सकते हैं। क्योंकि खाली बैठना बहुत बड़ी समस्या है। खाली बैठना जैसे कि — वो लोग जो बहुत घुलते-मिलते हैं, “ये और वो, बाहर जाकर पार्टी करना और सबसे मिलना।” अब आप ये नहीं कर सकते। आप बाहर नहीं जा सकते, आप अपने कमरे में ही हैं, अपनी अपार्टमेंट्स में ही, अपने घर में ही, जहां भी रहते हैं आप।

तो काफी वक़्त पहले मैंने अकेला बंद रहने की बात की थी। और मैं कहता था “अकेला बंद रहना सबसे बुरी सजा क्यों है ?” क्योंकि लोग सच में खुद को नहीं जानते। पर ये रहा एक कमाल का मौका, जो हमारे पास है। मैं इसके बारे में बात करता हूँ — तीन चीजें जो हमें चाहिए, वो तीन चीजें जो हमें चाहिए, पहली है: “खुद को जानना।”

क्योंकि अगर खुद को नहीं जानते, खुद को समझते नहीं हैं कि आप खुद क्या हैं! बाकी सभी चीजें जिनमें आप फंसे हैं, वो सब, “बाहर जाना और ये करना और वो करना और मेरी नौकरी और मेरा ये और मेरा वो।” ऐसे ही सबकुछ, रोज की मेहनत — और अचानक से हो जाए, अब आपको छुट्टी मिल जाती है, आपको छुट्टी मिली। लेकिन खुद के साथ!

अब क्या आप यह ले सकते हैं ? क्या आप कह सकते हैं ? “देखिये, मैं इस वक़्त मज़े कर सकता हूँ — क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं कौन हूँ और क्या कमाल का समय है खुद के साथ रहने का, जो मैं स्वयं हूँ यह समझना। अपने ऊपर दया होना, खुद को समझना, खुद के बारे में जानना।

एक बात जो करनी है वह है कि खुद को जानिए! खुद को जाने बिना असल में आप अंजान ही रहेंगे। एक अंजान व्यक्ति जो आपको जानता ही नहीं है।

फिर अचानक से ही, कोई वायरस कहीं से आ जाता है और दुनिया पर काफी प्रभाव डाल देता है। मेरा मतलब, यह ऐसा है कि जैसे कि एक डरावनी पिक्चर, एक तरह से। और फिर, अगली बात जो होती है, यह पूरी दुनिया पर प्रभाव डाल रहा है और पूरी दुनिया, सच में सरकारें गिर रही हैं कहते हुए कि, “अब आप अलग रहिये; आपको लॉकडाउन करना है और आप बाहर नहीं जा सकते और ये नहीं कर सकते और वो…”

और जब आप देखें कि नहीं करने वाली सूची कितनी बड़ी है तो हैरानी होगी। उस सूची में एक चीज है, जो आप कर सकते हैं और उसमें है — खुद के साथ रह जाना — आप खुद को जान सकते हैं, आप खुद को थोड़ा और बेहतर जान सकते हैं; आप खुद को समझ सकते हैं। क्योंकि ये बिलकुल बुनियादी बातें हैं!

बाकी चीजें जो मैं कहना चाहता हूँ, (बाकी दो चीजें जो मैं आने वाली वीडियोज़ में कहूंगा।) क्योंकि हम एक लॉकडाउन में हैं, मैं उनके बारे में और चर्चा कर सकता हूँ! पर ये रहीं आपके बारे में।

और अब इस परिस्थिति में, इन हालातों में, जो फिलहाल हमारे सामने हैं। आप यहीं हैं और आपको खुद के साथ होना है। लेकिन आप फिर क्या करेंगे; आप यह समय कैसे बिताने वाले हैं ? क्या आप परेशान ही रहेंगे; क्या आप यह कहते रहेंगे कि ” यह बहुत बुरा है” और आरोप लगाएंगे ? किसी और पर आरोप लगाना, यह करना हमें पसंद है।

पर बात यह है कि एक तरफ तो, इंटरनेट एक कमाल की चीज है — हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ यहाँ पर गलत जानकारी बहुत है। कई लोग बस कहते हैं, “अब हम ये करें; अब हम वो करें; अब हम ये करें; हम क्या करें ?”

तो काफी दिलचस्प समय है, लेकिन आप इसका सही उपयोग कर सकते हैं, अपने आपको जानने में। यह कहने की कोशिश करें, “परिस्थिति की बात नहीं है, लेकिन मैं क्या करता हूँ।” क्या मुझमें हिम्मत है ? क्या मुझमें स्पष्टता है ?

जब आप रामायण पढ़ते हैं या जब आप रामायण सुनते हैं, सबकुछ होता है बढ़िया! वो दिन जब उन्हें राजा बनाया जाना था, वह कमाल का दिन था — सभी तारे सही जगह पर थे और ऐसा ही सबकुछ। इसके बारे में काफी सारी बातें लिखी हुई हैं।

मेरे लिए, जब मैं इसे सुन रहा था तो मैंने सोचा कि इसमें सितारों ने कहा कि, “सब ठीक है, लेकिन असल में ऐसा हुआ ही नहीं।” क्योंकि जिस दिन उनका राज्याभिषेक होना था, वह वनवास जा रहे हैं — एक या दो या तीन वर्षों के लिए नहीं। बल्कि चौदह वर्षों तक वह वनवास में रहने वाले हैं।

वह राजकुमार नहीं बनेंगे; वह नहीं बन पाएंगे, कोई ऐसा जिन्हें सब पसंद करते हैं, वह जंगल चले जाएंगे! वह वनवास में चले जाएंगे। जो भी मिले वह खाना खाएंगे। ऐसा नहीं कि खानसामा है और वह कहेंगे कि “अच्छा! आज रात को मुझे ये खाना है ?”

और ऐसा है कि अकल्पनीय। लेकिन वह क्या करते हैं ? वह हिम्मत दिखाते हैं; वह आगे बढ़ते हैं और वह अंत तक इतने सारे बुरे लोगों को मार देते हैं कि बीच में जो आना चाहते थे। और वह आगे बढ़ते हैं और सीता की रक्षा करते हैं। वह अच्छाई की रक्षा करते हैं।

वह विष्णु के अवतार हैं। तो उस तरह से भी उनका एक उद्देश्य तो है ही। और इसलिए वह एक तरह से या दूसरी तरह से आप भी, हां! बिलकुल सही समझते हुए आप कह सकते हैं, “हाँ ये सब हुआ; यह होना लिखा था; यह ऐसा है।

पर इतना भी नहीं। उन्हें एक इंसान के रूप में देखें, क्योंकि वह थे, उनकी पत्नी थीं; और एक भाई था जो उनसे बहुत प्यार करता था। वह अपने पिता से प्यार करते हैं और पिता की कही हर बात निष्ठा से मानते हैं।

तो जो भी, मुझे लगा कि आपसे यह सब कहना अच्छा होगा कम से कम एक दिन — संकट के बारे में न सोचें, परेशानी का न सोचें, लेकिन परेशानी का सामना कैसे करेंगे हमलोग ?

तो मुझे उम्मीद है यह मदद करेगा — और मैं आपसे फिर मिलूंगा। आपका दिन शुभ हो! एक अच्छी शाम बीते; एक अच्छी रात बीते; और अच्छे दिन हों! और हां, इस वक़्त जो भी अच्छा कर सकते हैं, वह आप जरूर करें।

धन्यवाद!