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लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ #6 (29 मार्च, 2020) – Hindi

प्रेम रावत जी:

सभी श्रोताओं को मेरा हार्दिक नमस्कार! आज के दिन मैं किस विषय पर बात करूँगा और वह विषय वही है कि कई लोग हैं जो अभी भी डरे हुए हैं। देखिये! बात समझने की है। किसी भी दवा का — अब उदाहरण दे रहा हूँ मैं, तभी वह दवा काम आएगी जब उसका सेवन किया जाए। जेब में अगर रखी हुई है दवा तो उससे कुछ नहीं होगा।

हम बहुत कुछ सुनते हैं कि ऐसा करना चाहिए, वैसा करना चाहिए, ये करना चाहिए, वो करना चाहिए। परन्तु अंदर से डर आ जाता है कि हमारा क्या होगा! बात इस समय डरने की नहीं है। बात इस समय है ध्यान से काम करने की। शांति से काम करने की ताकि यह जो समय है इसका हम पूरा-पूरा फायदा उठाते हुए आनंद से, आराम से सुरक्षित रूप में यह समय चला जाये और जो अगला समय आने वाला है, जिसमें यह महामारी की जो बीमारी है इसका कोई हल निकल जाए, तबतक की बात है। बात सिर्फ तबतक की है। तो किस प्रकार, कैसे यह संभव होगा ? यह समझने की जरूरत है।

इसके लिए और लोग बताते हैं, यह करो, वह करो, बाहर से ये करो, आइसोलेशन होना चाहिए, ये होना चाहिए, सब ठीक है। इससे हम सहमत हैं। परन्तु यह आराम से कटे, यह आनंद से कटे, यह कैसे होगा ? इसके लिए आपको अपनी जरूरत है, किसी और की नहीं, अपनी जरूरत है। क्योंकि आपके अंदर अच्छाई भी है और बुराई भी है। आपके अंदर वह चीज भी है जो आपको परेशान करती है और आपके अंदर वह चीज भी है जो आपको आनंद से विभोर कर दे। अब बात यह है कि हमको इसमें से एक चूज़ (choose) करना है। एक पसंद करना है। अब वह कैसे करेंगे ?

देखिये! हर एक चीज धीरे-धीरे होती है। एक कहानी है और मैं सुनाता हूँ आपको। एक बार एक आदमी रोड पर जा रहा था। तो बाजार से निकला तो उसने देखा कि तरह-तरह की दुकानें है। कोई यहां दुकान है; कोई वहां दुकान है। कोई सब्जी बेचता है; कोई मिठाई बेचता है। कोई साड़ियां बेचता है; कोई कुछ बेचता है। तरह-तरह की दुकानें है। ऐसे ही चलता गया, चलता गया, चलता गया और उसको, जब वह एक जगह पहुंचा तो एक दुकान थी और बड़ी अजीब सी दुकान और ऊपर लिखा हुआ — यह जो डिवाइन है, जो दिव्य है, जो अनंत है, यह उसकी दुकान है। जो दिव्य है, उसकी दुकान है। मतलब यहां दिव्य बेचा नहीं जाता है, यह दिव्य जो है, यह उसकी दुकान है। अब उसने ऐसी दुकान कभी पहले देखी नहीं थी, तो वह गया और बाहर जैसे खिड़की बनाते हैं और खिड़की में चीजें लगाते हैं दुकानदार, तो वहां कुछ लगा हुआ नहीं था। उसने अंदर झाकने की कोशिश की, देखने की कोशिश कि कोई है, कुछ नहीं दिखाई दिया उसको। पर दरवाजा था, तो वह दरवाजे से अंदर गया।

अब जैसे ही वह अंदर पंहुचा तो इतनी विशाल अंदर से दुकान कि पूछो मत! और बाहर से तो जितनी बड़ी लगे वो लगे। पर अंदर वह इतनी बड़ी कि पूछो मत। उसको बड़ा अचम्भा हुआ। खैर, थोड़ा आगे चला तो एक व्यक्ति आया कि “मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।”

तो उसने कहा — “हां! यह — क्या बेचते हैं आप यहाँ ?”

कहा — “जी यह जो दिव्य है, जो अनंत है, जिसने सारे संसार की रचना की है। यह उसकी दुकान है।” और यहां क्या बेचा जाता है ? यहां बेचा जाता है शांति, यहां बेचा जाता है आनंद, यहां आपको मिलेगा वह असली चीज, जो सत्य आपके अंदर है, यह उसकी दुकान है।

तो उसने कहा — “कोई नमूना है आपके पास ?”

कहा — “हां! आइये, देखिये!”

वह ले गया तो वहां आलमारी बड़ी-बड़ी लगी हुईं हैं, बड़ी-बड़ी, बड़ी-बड़ी। और उनमें बहुत सुंदर जैसी चीजें सजी हुई हैं। अब उसका वर्णन भी करना मुश्किल है। पर रंग-बिरंगे उनके रंग और अति सुन्दर और बड़ी-बड़ी ऐसी चीजें वहां लगी हुई हैं।

तो पूछा उसने कि “यह क्या है ?”

तो कहा कि “यह शांति है, दूसरी तरफ एक चीज कोई और थी उसकी तरफ देखकर उसने कहा, यह आनंद है, यह स्पष्टता है, तो ऐसे करके उसने दिखाया।”

तो उसने कहा, “यह तो बहुत सुन्दर है।”

कहा, “बिलकुल सुंदर है। इनसे सुन्दर मनुष्य के लिए और कोई चीज ही नहीं है।”

तो उसने कहा, “मैं यहां से ये चीजें खरीद सकता हूँ।”

कहा, “बिलकुल!”

तो उसने कहा, “कितनी खरीद सकता हूँ ?”

कहा, “जितनी आपको चाहिए।”

कहा, “कितने की है?”

कहा, “मुफ्त! कोई पैसा नहीं।”

वह सोचने लगा, बाप रे बाप! ये सारी चीजें, ये आनंद, ये शांति, ये सुख, ये स्पष्टता, ये सारी चीजें मैं यहाँ से खरीद सकता हूँ, ले जा सकता हूँ और बिलकुल मुफ्त में और जितनी मेरे को चाहिए उतनी। यह तो बहुत ही बढ़िया बात है।

तो उसने कहा, “मेरा आर्डर ले लो। और मैं चाहता हूँ कि ये जो चीजें हैं, यह मैं अपने बच्चों के लिए, अपने परिवार के लिए, अपनी पत्नी के लिए, अपने मित्रों के लिए, जो मेरे रिश्तेदार हैं उनके लिए, सबके लिए मैं चाहता हूँ, तो आप सबके लिए 20-20, ये जो हैं, सब पैक कर दीजिये।”

उसने कहा, “बिलकुल! मैं अभी आता हूँ।” तो वह व्यक्ति चला गया।

15-20 मिनट के बाद वह आया। और छोटे-छोटे डब्बे उसके पास थे। तो उन डब्बों को उसने उस व्यक्ति को दिया कि “यह जो आपका आर्डर है यह इसमें है।”

उसने कहा, ये तो — ये बाहर तो बड़ी-बड़ी हैं और ये आपने इनको छोटे-छोटे डब्बों में कैसे भर दिया ?

तो उसने कहा, “जी! यह सिर्फ बीज हैं, बीज, उन चीजों के। आपके अंदर जो आनंद है, आपके अंदर जो स्पष्टता है, यह उनके बीज हैं। जाइये और दीजिये इन बीजों को जिसको भी आप देना चाहते हैं। और वो इन बीजों को बोयें। तब जाकर ये सुंदर-सुंदर चीजें उन बीजों से उत्पन्न होंगी।”

यह कहानी बहुत सुन्दर है। मेरे को अच्छी लगती है। क्यों ? क्योंकि इन चीजों के बीज ही मिलेंगे हमको। बस! बीज और यह बीज हमारे अंदर हैं। परन्तु कभी हमने इन बीजों को बोया नहीं, तो कैसे हम फल की कल्पना कर सकते हैं। कैसे हम फल की आशा कर सकते हैं। अगर इन बीजों को कभी हमने बोया ही नहीं। हमनें कभी यह समझा ही नहीं कि इन चीजों को अगर हम अपने जीवन के अंदर चाहते हैं, तो इसको बोना पड़ेगा। और इन परिस्थितयों में ये चीजें और भी जरूरी हो गयी हैं। अब क्या करोगे, अब क्या करोगे ?

मतलब पहले तो यह है कि, “जी! मेरे को बढ़िया फोन चाहिए, मेरे को बढ़िया कार चाहिए, मेरे को बढ़िया मोटरसाइकिल चाहिए, मेरे को बढ़िया ये चाहिए, मेरे को बढ़िया वो चाहिए।” ले आओ बढ़िया सबकुछ, उससे तो यह परिस्थिति बदलेगी नहीं। अगर तुम नया फोन भी ले आये, तो उससे परिस्थिति तो बदलेगी नहीं। तो सारी टेक्नोलॉजी, सारे आविष्कार, जितने भी सबकुछ हो रहा है बाहर कि “अब ये होगा, अब वो होगा, ये होगा, वो होगा!” सारी पॉलिटिक्स, वो कुछ नहीं कर सकती। सारी मूवी इंडस्ट्री, वो कुछ नहीं कर सकती। बड़े-बड़े बलवान लोग, बड़े-बड़े धनवान लोग, वो कुछ नहीं कर सकते — यह तो महामारी है।

हां! आप कुछ कर सकते हैं अपने लिए। क्योंकि आप अपने लिए आनंद ला सकते हैं। और आनंद लाने के लिए, अपने अंदर स्थित ये जो चीजें हैं, इनके बीज बोना बहुत जरूरी हैं। बोओ, इन बीजों को बोओ! ताकि ये बीज उत्पन्न होकर तुमको बढ़िया से बढ़िया फल दे सकें। सुंदर बात यह है कि इस बीज के लिए मौसम की जरूरत नहीं है। इस बीज को बोओ। इसमें बढ़िया से, जो तुम्हारे अंदर आनंद है उसका पानी दो। जो तुम्हारे अंदर जिज्ञासा है उसका पानी दो। तो ये बीज अपने आप बड़े होंगें। फूलेंगे, फलेंगे ताकि यह समय भी तुम्हारा आनंद से बीत जाये। डर से नहीं, आनंद से बीत जाए। और तुम्हारे जीवन के अंदर एक ऐसा परिवर्तन आ जाए, जो सिर्फ इस मुश्किल समय में नहीं, पर जब भी तुम्हारे जीवन के अंदर मुश्किलें आएं, तुम उन बीजों को, उनके फलों को, उनका सेवन कर के अपनी जिंदगी के अंदर वाह-वाह कर सको। सबसे बड़ी बात यह है।

डर से कुछ नहीं होगा, डरने से कुछ नहीं होगा। जहां बात है हिम्मत की, तो हिम्मत से बहुत कुछ होगा। जहां बात है कि स्पष्ट होकर के जो व्यक्ति चलेगा आगे, वह कहीं न कहीं पहुंचेगा। जो डरेगा, कहीं नहीं जाएगा। उसके लिए कुछ नहीं है। तो ये चीजें, इन चीजों का ज्ञान होना, इन चीजों को समझना। क्योंकि हम अपने जीवन के साथ करते क्या हैं ? करते ये हैं कि किसी और की जिम्मेवारी — या तो भगवान की, “हे भगवान! तू ही चला गाड़ी। मेरे को नहीं चलानी।”

यह तो वही वाली बात हो गयी कि तुम चढ़े बस में, कहीं तीर्थ यात्रा पर जा रहे हो, भगवान के दर्शन करने के लिए जा रहे हो, ड्राइवर भी बड़ा भक्त है और ड्राइवर कहता है, “अब भगवान ही गाड़ी चलाएगा मैं तो चलाऊंगा नहीं और स्टीयरिंग व्हील छोड़ दे।” तो क्या होगा ? उसका नतीजा अच्छा नहीं होगा। क्योंकि यह जो मनुष्य शरीर तुमको मिला है, यह तुमको दिया गया है। इस बात को याद रखो, यह तुमको दिया गया है। इसकी जिम्मेवारी तुम्हारी है। और करना क्या है ? करना यह है कि जो आनंद है और मैं एक उदाहरण और देता हूँ, तो हो सकता है इस उदाहरण से आपको समझ में आये मैं क्या कह रहा हूँ —

कोई आपके पास आता है और आपसे कहता है, “आपकी लॉटरी लग गयी।” और लॉटरी क्या है कि एक शॉपिंग मॉल है, जहाँ बहुत सारी दुकानें हैं, हर एक तरह की दुकान है। खाने की दुकानें हैं, कपड़े की दुकानें हैं, चीजों की दुकानें हैं, घड़ियों की दुकानें हैं, ज्वेलरी की दुकानें हैं, साड़ियों की दुकानें हैं, सूटों की दुकानें हैं, टाईयों की दुकानें हैं, जूतों की दुकानें हैं, हर एक चीज की दुकान हैं वहां। और आप उस जगह जा सकते हैं और जो चाहें आप उस शॉपिंग मॉल में ले सकते हैं। परन्तु एक शर्त है, जब आप उस शॉपिंग मॉल से बाहर निकलें, तो आप कोई भी चीज जो उस शॉपिंग मॉल में आपने ली है, उसको अपने साथ नहीं ले जा सकते। तब क्या करेंगे आप ? और एक निश्चित समय है इस समय में आप जाएं, उस शॉपिंग मॉल में जाएं और जो आपको अच्छा लगे आप ले सकते हैं। परन्तु जब समय पूरा होगा, आपको उस शॉपिंग मॉल से निकलना पड़ेगा और जब शॉपिंग मॉल से आप निकलेंगे, तो आप अपने साथ कोई भी चीज जो आपने ली है, वह अपने साथ ले जा नहीं सकते। तब करेंगे तो क्या करेंगे ?

मतलब मेरा यह कहने का है, अपने साथ तो कुछ ले जा नहीं सकते, तो फिर फायदा क्या हुआ ? तो कई लोग हैं, वो कहते हैं कि हम काहे के लिए जाएं वहां ? नहीं! जाएं और खूब आनंद लें, जितना आनंद ले सकते हैं उतना आनंद लें और फिर जब समय आये, ठीक है! छोड़कर वापस अपने घर जाएं। इस उदाहरण का तुक क्या हुआ ?

यह जो संसार है, जिस संसार में आप हैं, यह है वो शॉपिंग मॉल। और आपकी लॉटरी लग गयी। और लॉटरी क्या है कि आएं हैं आप इस शॉपिंग मॉल में और आप हर एक चीज का आनंद ले सकते हैं। पर जब जाने का समय होगा, अपने साथ कोई चीज ले जा नहीं सकते। तब आप क्या करेंगे ? यह कानून है। आप तो ऐसे इकट्ठा कर रहे हैं जैसे कि इसको साथ ले जाएंगे। पर ले जा नहीं सकते, तो करेंगे तो क्या करेंगे ?

मतलब, एक ही चीज कर सकते हैं और वह है कि आप अपने जीवन में यहां रहने का पूरा-पूरा फायदा उठाएं। आनंद लें। क्या मेरा जीवन आनंदमय बीत रहा है या नहीं ? यह सवाल भी पूछना बहुत जरूरी है। सबलोग आगे की कमाई की बात करते हैं, परन्तु इस समय की बात कोई नहीं कर रहा है। और इस समय की बात मैं करता हूँ। क्योंकि यह खेल जो है इन दो दीवालों के बीच में, कौन सी दीवालें ? एक दीवाल, जिससे आप आये इस संसार के अंदर और एक दीवाल, जिसके दूसरी तरफ आप जायेंगे तो फिर कहां गए किसी को पता नहीं चलेगा। इन दो दीवालों के बीच में आपके पास जो समय है, इन दो दीवालों के बीच में है सारा खेल। आप दुखी होकर के भी बिता सकते हैं, आप सुखी होकर के भी बिता सकते हैं। इससे समय के ऊपर कोई अंतर नहीं पड़ेगा। इसको आप आनंदमय होकर के भी बिता सकते हैं और आप इसको रो-रो करके भी बिता सकते हैं। समय का कोई इसमें अन्तर नहीं आएगा। परन्तु यह बात जरूर है अगर इसको आप रो-रो करके बिताएंगे तो आपको दुःख होगा और आप इसको अगर आनंद से बिताएंगे, तो आप ही को आनंद होगा, सुख मिलेगा।

मैं चाहता हूँ कि आपके जीवन में सुख हो। मैं चाहता हूँ कि इस परिस्थिति में भी, जो इतनी गंभीर परिस्थिति है ये, इसमें भी आपके जीवन में आनंद होना चाहिए। और आनंद संभव है और आनंद आपके जीवन में होना चाहिए। उससे आप अच्छी तरीके से, साफ-साफ रूप से देख सकेंगे, डरकर नहीं पर आनंद से कि क्या आपको आगे करना है! कैसे आपको सब्र रखनी है! कैसे आपको हिम्मत से काम लेना है! ये चीजें इस समय बहुत जरूरी हैं। अब यह मज़ाक की बात नहीं रह गयी, यह कोई लक्ज़री की बात नहीं है, यह कोई ऑप्शन की बात नहीं है कि “हां, ठीक है भाई! अब बता दो क्या है, नहीं है, ऐसा है, वैसा है।”

हमारे पास — अब लोग तो कहते थे, जब हम कहते थे कि, “तुम्हारे अंदर शांति है, शांति को जानो!”

लोग कहते थे, “अजी! हमारे पास इन चीजों के लिए टाइम नहीं है।”

अब तो है! अब तो टाइम है, अब क्या कर रहे हो, अब कहाँ भाग रहे, किसके पीछे भाग रहे हो, किसके पीछे दौड़ रहे हो ? अब तो यह हाल हो जाएगा कि खुद बैठे-बैठे लोग कहेंगे कि “क्या करूँ मैं ?” परेशान हो जाएंगे, अपने आप से परेशान हो जाएंगे। जब मनुष्य अपने आप से परेशान होने लगेगा, तो फिर और परेशान करने के लिए किसकी जरूरत पड़ेगी ? किसी की भी नहीं! और हमको तो इस बात का एहसास है। हम तो जातें हैं, जगह-जगह जाते हैं, जेलों में जाते है और वहां जिंदगियों को बदलते हैं। वहां तो — वह तो हमेशा ही लॉकडाउन रहता है वहां तो। कहीं जा ही नहीं सकते। वहां हम बदलते हैं लोगों की जिंदगियों को। और कैसे बदलते हैं ? यही कि — “जिस अच्छाई की तुमको जरूरत है, जिस अच्छाई को तुम खोज रहे हो, वह तुम्हारे अंदर है” — ऐसे बदलते हैं।

और यही सन्देश हम चाहते हैं कि आप भी सुनें, क्योंकि आपके जीवन के अंदर भी आनंद होना चाहिए। और अगर वह आनंद होगा, तो आप अच्छी तरीके से, डर से नहीं, डर से तो आँख बंद होती हैं। और जब हिम्मत होती है, तो आँख खुलती हैं। क्या करना है, क्या नहीं करना है! आपको समझना है कि “एक, किसी को यह बीमारी दें ना, अगर आपको लगी हुई है यह बीमारी तो, किसी को दें ना और किसी से लें ना!”

जो आइसोलेशन है, लॉकडाउन है, ये वैज्ञानिकों का, डॉक्टरों का यही कहना है कि, भाई! ऐसा करने से बीमारियां कम फैलेंगी। हाथ धोइये, हाथ धोइये और एक -दूसरे से कम से कम इस समय में 6 फीट का जो डिस्टेंस है, 6 फीट की जो दूरी है, वह बनाकर रखिये।

ये तो हुई — ये चीजें तो आपको उस बीमारी से बचाएंगी, परन्तु एक और बीमारी लग रही है न, वो बोर्डम (Boredom) की बीमारी उससे कौन बचाएगा ? कन्फ्यूश़न (confusion) की बीमारी, भ्रमित होने की बीमारी, उससे कौन बचाएगा ? तो उसके लिए आपको अपनी जरूरत है। आपको अपनी जरूरत है। तो इस बात का ख्याल रखिये, आनंद से रहिये। फिर मैं आपसे बात करूँगा इस वीडियो के द्वारा। तब तक के लिए मेरा बहुत-बहुत नमस्कार!