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लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ #42 (6 मई,2020) – Hindi

“यह जो हमारा समय है पृथ्वी पर, क्या हम जीवन को इस तरीके से जी सकते हैं जो हमारे लिए सुखमय हो, और दूसरों के लिए भी सुखमय हो ? जिसमें हम दूसरों को ठेस न पहुंचाए और दूसरे भी हमको ठेस न पहुंचाएं ?” —प्रेम रावत

यदि आप प्रेम रावत जी से कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं, तो आप अपने सवाल PremRawat.com (staging.premrawat.com/engage/contact) के माध्यम से भेज सकते हैं।

Audio

प्रेम रावत जी:

बड़ा सुंदर दृष्टांत है यह! तो द्रौपदी — कई नाम हैं द्रौपदी के। एक नाम नहीं है! पंचाली भी नाम है, कृष्णा भी नाम है। वह भी द्रौपदी का नाम है। क्योंकि वह — उसका रंग एकदम गोरा नहीं था। और कृष्णा का मतलब होता है, जिसका रंग गोरा न हो। थोड़ा-सा काला हो। कृष्णा का मतलब ही यह है। तो एक दिन की बात है कि द्रौपदी सुनती है कि कोई बहुत ही पहुंचा हुआ ऋषि आया है शहर में और वह फ्यूचर, भविष्य की सारी बातें बताता है।

तो वह जाना चाहती है और जानना चाहती है कि उसके भविष्य में क्या है ? तो वह गई, जहां ऋषि बैठे थे। और यह ऋषि, और कोई ऋषि नहीं थे, यह वेद व्यास थे। तो वह गई वहां। वेद व्यास ने कहा, ‘‘क्या चाहिए ?’’

कहा, ‘‘मेरे को मालूम करना है कि मेरे भविष्य में क्या होगा ?’’

कहा, ‘‘तुझे नहीं मालूम ? तू यहां क्यों पैदा हुई है ? तेरी वजह से लाखों औरतें विधवा होंगी। तेरी वजह से लड़ाई होगी। भयंकर युद्ध होगा।’’

द्रौपदी को बड़ा बुरा लगा, ‘‘मेरी वजह से होगा ?’’

कहा, ‘‘हां! तेरी वजह से होगा!’’

‘‘खून की नदियां बहेंगी! तेरी वजह से बहेंगी!’’

तब द्रौपदी बोलती है कि ‘‘इसका कोई — इसका कोई इलाज नहीं है ? यह बात पलटी नहीं जा सकती ? मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से विधवायें हों! मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से खून की नदी बहे! मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से यह घमासान युद्ध हो!’’

कहा, ‘‘नहीं, यह तो होना है! क्योंकि जिन-जिन राजाओं का बध होगा इस लड़ाई में, वह ठीक नहीं हैं, वह अच्छे नहीं हैं। उन्होंने बुरे के साथ, साथ दिया है। बुरे का साथ दिया है। तो इनका किसी न किसी तरीके से संहार जरूर होना है। इसीलिए तू पैदा हुई है।’’

तो वह कहती है, ‘‘नहीं! कोई इलाज तो जरूर होगा इसका!’’

तो वेद व्यास, जो इसका इलाज बताते हैं, वह मैं बताना चाहता हूं। कहानी का जो — यह तो कहानी है। पर जो इलाज है, तो वेद व्यास जी कहते हैं द्रौपदी से, ‘‘देख! अगर तू तीन चीजें कर पाए अपने जीवन में — तीन चीजें, तो यह युद्ध नहीं होगा।”

कहा, ‘‘क्या ?’’

कहा कि एक, किसी को ठेस मत पहुंचाना! 2017 — तब की बात, अब की बात! और यह बात जो मैं कह रहा हूं, यह महाभारत से पहले की है। उस युद्ध से पहले की है। क्योंकि अभी युद्ध हुआ नहीं है। अभी तो द्रौपदी द्रौपदी है। अभी तो द्रौपदी की शादी भी नहीं हुई है।

एक, किसी को ठेस मत पहुंचाना! और अगर तुमको कोई ठेस पहुंचाए तो बुरा मत मानना! एक तो तुम किसी को ठेस मत पहुंचाओ! और अगर तुमको कोई ठेस पहुंचाए तो बुरा मत मानना! और अगर बुरा मान भी जाओ तो बदले की भावना मत लाना! रिवेंज़! तीन चीजें! एक तो किसी को ठेस मत पहुंचाना! डॉन्ट अफेन्ड ऐनीवन!

इफ सम्बडी अफेन्डस यू — अगर कोई तुमको अफेन्ड करता है, कोई ठेस पहुंचाता है — डॉन्ट बी अफेन्ड। और ठेस पहुंच भी गयी तो फिर क्या करते हैं हम ? बदला लेंगे! नहीं ? और ये तीनों चीजें कर्म से और वचन से — न कर्म में, न वचन में किसी को ठेस पहुंचाना। और अगर कोई हमारे को पहुंचाता है ठेस — अफेन्ड करता है, डान्ट बी अफेन्डेड!

द्रौपदी बड़ी खुश हुई! “वाह! यह तो मैं कर सकती हूं। यह तो मैं कर सकती हूं।”

और वही चीज द्रौपदी के साथ हुई! जब इन्द्रप्रस्थ बना! बहुत ही सुंदर महल था। एकदम पॉलिस्ड मार्बल! तो कहीं पॉलिस्ड मार्बल है और कहीं पुल है पानी का। दुर्योधन को वह महल दिखाया जा रहा है।

द्रौपदी कहती है, ‘‘इधर से आओ!’’

वह देखता है चमकीला, कहता है, ‘‘नहीं! मैं इधर से आऊंगा!’’

और इधर से आता है तो वह पानी में गिर जाता है। उसने सुनी नहीं बात द्रौपदी की। द्रौपदी ने कहा, ‘‘इधर से आओ!’’

अब द्रौपदी के साथ तो पहले ही दुर्योधन खुंदक खाए हुए था। तो वह कहती है। मतलब, वो वाली बात हो गयी कि वह कहती है कि ‘‘बाएं मुड़ो’’ तो वह दाएं मुड़ेगा! तो उसने कहा, ‘‘इधर से आइए!’’

उसने कहा, ‘‘नहीं, मैं इधर से नहीं, इधर से आऊंगा!’’

वह गिर गया पानी में, वह हँस पड़ी। ‘‘किसी को ठेस मत पहुंचाओ!’’

दुर्योधन ने फिर द्रौपदी को अफेन्ड किया। उसको ठेस पहुंचाई! कैसे ? उसके कपड़े निकाल के। ठेस भी पहुंची उसको और दूसरी, सबसे बड़ी चीज उसने क्या की ? इसका मैं बदला लूंगी। और उस बदले में भीम ने कहा — दुःशासन! जब दुःशासन ने कहा, “यहां आकर बैठ!’’ कहा, ‘‘इसी टांग को मैं तोडूंगा — तेरा खून पीऊंगा।”

यही हुआ। तीन चीजें! कहानी तो है जो कहानी है! और कहानी सुनाने वाले तो बहुत हैं। पर इसमें जो मूल चीजें हैं, वो यह है कि हमारे जीवन के अंदर, यह जो हमारा समय है इस पृथ्वी पर, क्या हम इस जीवन को इस तरीके से जीएं, जो हमारे लिए भी सुखमय हो और दूसरे के लिए भी सुखमय हो! जिसमें हम दूसरे को ठेस न पहुंचाएं और दूसरा हमको ठेस न पहुंचाए। मतलब, सारा चक्कर तो यहीं खतम हो जाएगा। क्योंकि, अब लोग कहते हैं, ‘‘शांति! शांति चाहिए, शांति चाहिए!” कब कहते हैं ? जब अशांति उनको तंग करती है। उससे पहले कौन पूछता है शांति को ? शांति क्या है ? किसी को कहो कि तुमको शांति चाहिए ? तो वह कहेगा, ‘‘You are weird. दिमाग तो ठीक है तुम्हारा ?’’

देखो! तुम चाहे अपने को कितना भी बुद्धिमान समझो। तुम चाहे कितना ही अपने को बुद्धिमान समझो। और मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तुम नहीं हो। हो! और चाहे कितना भी बुद्धिमान समझो, यह जितना भी तुम जानते हो, यह तुम्हारे दिमाग में डाला गया है। भगवान! छोटा बच्चा नहीं जानता कि भगवान क्या होता है। छोटा बच्चा नहीं जानता कि नरक क्या होता है। छोटा बच्चा नहीं जानता है कि स्वर्ग क्या होता है। छोटा बच्चा नहीं जानता है कि पाठ-पूजा करने से यह होगा। छोटा बच्चा तो यह भी नहीं जानता कि शांति क्या होती है। छोटा बच्चा यह भी नहीं जानता है कि अशांति क्या होती है। छोटा बच्चा नहीं जानता है कि देवी देवता क्या होते हैं। छोटा बच्चा नहीं जानता, कुछ नहीं जानता।

जैसे-जैसे हर एक दिन जाता है, बीतता है, बच्चा सीख रहा है, सीख रहा है, सीख रहा है, सीख रहा है, सीख रहा है। जब तुम बोलते हो, मां बोलती है कुछ बच्चे से या बाप बोलता है या और कोई बोलता है बच्चे से, उसको एक भी शब्द समझ में नहीं आ रहा है, वह सिर्फ आवाज सुन रहा है और कई बार वह चिल्लायेगा बिना बात के। वह सोच रहा है, वह भी बोल रहा है। वह सोच रहा है, वह भी बोल रहा है। परंतु वह तुमको समझ में नहीं आ रहा है, क्या कह रहा है।

धीरे-धीरे-धीरे-धीरे करके वह सीखेगा क्या ? माँ, पिता या बाप। धीरे-धीरे-धीरे-धीरे करके ये सारी चीजें उसके दिमाग में डाली जायेंगी। उसको एक — यह उसको नहीं मालूम एक क्या होता है। एक तो तुमको भी नहीं मालूम है क्या होता है। क्योंकि अगर तुमने कभी पूछने की कोशिश की हो, तो तुमको समझाने वाला कोई नहीं मिलेगा, एक क्या होता है, दो क्या होता है। वह तो तुमको सीखना पड़ता है। वह तो रटना पड़ता है। 1, 2, 3, 4, 4 क्यों ? और कुछ क्यों नहीं ? ना! सीखना पड़ेगा।

यह धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे सारी चीजें हमारे दिमाग में डाली जाती हैं। पर कभी न कभी तुमको तो बैठ करके यह जानना चाहिए कि जो मेरे दिमाग में डाला गया है, जो मेरे दिमाग में डाला गया है, कितना वह मेरी भलाई के लिए है और कितना वह मेरे को हानि पहुंचाता है। कभी अकाउन्टिंग जिसे कहते हैं बेसिक अकाउन्टिंग कभी की है, जो तुम्हारे दिमाग में है, तुम उसको स्वीकार करते हो, बिना प्रश्न पूछे।

तुम्हारे हित की चीज क्या है और अनहित की चीज क्या है, यह तुमको मालूम होना चाहिए, जिस चीज को करने से तुम्हारा भला होगा। क्योंकि एक बात मैं कह रहा हूं कि इस जीवन के संघर्ष में, क्योंकि अभी संघर्ष बन गया है यह, हर दिन, हर दिन कुछ न कुछ करना है। कुछ न कुछ करना है। कुछ न कुछ करना है। कुछ न कुछ करना है। संघर्ष बन गया है। लड़ाई की तरह है — किसी दिन हार रहे हैं, किसी दिन थोड़ा-सा जीत रहे हैं। फिर हार रहे हैं, जीत रहे हैं। हार रहे हैं, जीत रहे हैं। परेशानी है।

अगर यह लड़ाई है इस जीवन के अंदर। तो सबसे पहली चीज किस पर जीत होनी चाहिए ? क्योंकि जो भी तुम्हारी समस्याएं हैं, तुम उनको जीतना चाहते हो। एक तरफ तो तुम हो, एक तरफ तुम्हारी समस्याएं हैं। सबसे पहली जीत किसकी होनी चाहिए ? किस पर होनी चाहिए ? किसकी होनी चाहिए और किस पर होनी चाहिए ? क्योंकि अगर तुमने अपने आपको नहीं जीता है, अगर तुमने अपने आपको नहीं जीता है, तो तुम किसी भी चीज पर जीत नहीं हासिल कर पाओगे। चाहे ऐसा लगे भी कि कर ली है, कर नहीं पाओगे। वह तुम्हारी नहीं है, क्योंकि तुम खुद ही अपने आपको हारे हुए हो।

तो सबसे पहली जीत जो हासिल करनी है इस जीवन के अंदर, वह अपने पर करनी है। वह अपने पर करनी है। विक्ट्री अपने पर होनी चाहिए सबसे पहले। और अपने पर अगर विक्ट्री नहीं हुई तो किसी चीज के ऊपर भी तुम जीत हासिल नहीं कर पाओगे।