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लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ #24 (16 अप्रैल, 2020) – Hindi

“आप अपनी जिंदगी में कैसे बीज बो रहे हैं ? बीज, जिनकी फसल शांतिमय होगी, आनंददायक होगी या ऐसे बीज जो आपकी जिंदगी में अशांति बढ़ाएगी ?” —प्रेम रावत (16 अप्रैल, 2020)

यदि आप प्रेम रावत जी से कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं, तो आप अपने सवाल PremRawat.com (staging.premrawat.com/engage/contact) के माध्यम से भेज सकते हैं।

Audio

प्रेम रावत जी:

सभी श्रोताओं को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार! आशा है आप सब कुशल-मंगल होंगे।

मेरे को मालूम है कि यह जो लॉकडाउन की टाइमलाइन है यह बढ़ाई जा रही है ताकि आप लोगों को और कुछ दिनों के लिए लॉकडाउन में रहना पड़ेगा और मुझे यह भी अच्छी तरीके से विश्वास है कि कई लोग हैं जो इससे खफ़ा हैं। देखिये! खफ़ा होने की बात नहीं है, डरने की बात नहीं है।

बात सिर्फ यह है कि यह जो आपको मौका मिला है और मैं कह रहा हूं कि यह मौका मिला है, यह बार-बार नहीं आता है। यह ऐतिहासिक चीज हो रही है, जो हो रही है। पूरा भारतवर्ष नहीं, पूरा संसार लॉकडाउन में है और हर एक देश में कहीं ना कहीं इसका अफेक्ट, इसकी प्रतिभा देखी जा रही है। इसका असर सब जगह हो रहा है। एयरलाइंस में है, किसानों के लिए है, ट्रांसपोर्टेशन के लिए है, किसी भी चीज को देख लीजिए — दुकानदार हैं उनके लिए है और डॉक्टर लोग जो हैं वह तो बहुत ही मेहनत कर रहे हैं। नर्स लोग जो हैं वह तो बहुत ही मेहनत कर रहे हैं और हर रोज बीमार लोग इससे हर रोज इनकी संख्या बढ़ रही है। परन्तु आप लॉकडाउन में हैं और यह भी खुशी है कि आप सुरक्षित हैं परंतु यह समय, जो ऐतिहासिक समय है क्योंकि यह बार-बार नहीं आता। यह एक समय है कि इस संसार में रहते हुए आप एक काम करें और वह काम कुछ ऐसा हो जिससे कि आपकी जिंदगी के अंदर आनंद और बढ़े। जो अच्छी चीजें हैं वह और हों। आप अपने जीवन के अंदर उस असली सुख और चैन और शांति का अनुभव कर सकें।

अब यह कहना तो बहुत आसान है। कई लोग हैं जो भाषण देते हैं, भाषण सुनाते हैं और फिर उसके बाद कहते हैं “शांति, शांति, ओम शांति, शांति, शांति,” — शांति-शांति-शांति करने से शांति नहीं होती क्योंकि अगर आप किसी को कह रहे हैं कि “चुप हो जा, चुप हो जा, चुप हो जा, चुप हो जा, चुप हो जा” या आप किसी कमरे में बैठे हैं और आप कह रहे हैं हम सभी को “चुप हो जाना चाहिए, चुप हो जाना चाहिए, चुप हो जाना चाहिए, चुप हो जाना चाहिए” और आप सोचते हैं कि यह दोहराते रहें कि — चुप हो जाना चाहिए, चुप हो जाना चाहिए, चुप हो जाना चाहिए उससे फिर आवाज नहीं आएगी जबतक आप यह बोलते रहेंगे कि चुप हो जाओ सब लोग, चुप हो जाओ सब लोग तब तक कोई चुप नहीं होगा, क्योंकि तुम ही चुप नहीं हो रहे हो।

सबसे बड़ी जानने की बात यही है कि कौन-कौन से बीज आप अपने जिंदगी के अंदर बो रहे हैं, कैसे बीज बो रहे हैं ? ऐसे बीज बो रहे हैं जिनकी फसल जब तैयार होगी तो वह शांतिमय होगी, वह आनंददायक होगी या ऐसे बीज बो रहे हैं जिनसे कि आपकी जिंदगी के अंदर अशांति और बढ़े ? जो कुछ भी आप अब कर रहे हैं इसी का फल आपको मिलेगा। जो कुछ भी हो रहा है इसी का फल आपको मिलेगा। ठीक है परिस्थिति आपके इशारों के, आपकी इच्छाओं के अनुकूल नहीं है परन्तु है, जैसी है वैसी है।

अगर पृथ्वी जो सचमुच में इतनी दुःख में है — सारी प्रकृति, अगर सारी प्रकृति यह कहे कि मुझे कुछ राहत चाहिए, कुछ राहत चाहिए तो वह ऐसा ही कोई माहौल बनाएगी जिससे कि सारे लोग शांति से एक जगह बैठें ताकि सारी प्रकृति को राहत मिल सके। आपको राहत मिल रही है या नहीं पर सारी प्रकृति को राहत मिल रही है। प्रदूषण कितना कम हुआ है, हवा कितनी साफ हुई है यह तो प्राकृतिकली बहुत अच्छी बात है। जब प्रकृति के लिए यह अच्छी बात हो सकती है तो आपके लिए यह अच्छी बात क्यों नहीं हो सकती है ?

बिल्कुल हो सकती है। लोग अभी भी अपनी भावनाओं में रहते हैं, अपनी कल्पनाओं में रहते हैं, कहीं किसी के लिए कुछ है, किसी के लिए कुछ है। तुम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हो, तुम ऐसा क्यों नहीं कर रहे हो और यह भी संभव है कि कई जो परिवार में इतने दिन एक साथ कभी रहे नहीं तो कोई कहीं किसी में बिज़ी था, कोई कहीं किसी में बिज़ी था, कोई कहीं बिज़ी था। अब एक जगह रह रहे हैं और हो सकता है कि यह भी बहुत संभव है कि आपस में खूब लड़ाई हो रही है। “कब खत्म होगा, कब खत्म होगा, कब खत्म होगा, जा रहा हूं बाहर — मेरे को यह पसंद नहीं है, मेरे को यह पसंद नहीं है, मेरे को यह पसंद नहीं है” — सारी बातें आगे आ रही हैं। जो बच्चा है वह और कुछ करना ही नहीं चाहता है वह बैठकर अपना वीडियो गेम देखना चाहता है और वीडियो गेम आया कहां से ? आया कहां से ? वीडियो गेम जो बच्चा, आपका बच्चा वीडियो गेम खेल रहा है, जो आपको पसंद नहीं है क्योंकि आप चाहते हैं कि वह अपना गृह-कार्य करे या कुछ पढ़े, कुछ लिखे, कुछ समझे या आपके साथ बैठकर बात करे। वह आपका — जो खिलौना, जो आप लाए उसके लिए, जो वीडियो गेम आप लाये, वह लाया कौन ? वह आप ही तो लाये। आपने ही वह बीज बोया है। बच्चे ने की हठ, आपने कहा ठीक है, मैं इसकी हठ नहीं सुनना चाहता हूं। मैं नहीं सुनना चाहता हूं कि यह हर एक रोज मेरे को टोके। एक चीज को टालने के लिए आपने दूसरी — एक बीमारी को निकालकर आपने दूसरी बीमारी डाल दी। अगर आप यह कहते “नहीं, नहीं!” क्यों ? आप समझते हैं कि सभी लोग यह गेम खेल करके बड़े हुए हैं। अरे! जब हम बड़े हो रहे थे यह ऐसे गेम नहीं थे तब क्या करते ? खुद खेलते थे। दोपहर का जो समय होता था, सब लोग सोये रहते थे तो हम भी जाते थे खेलने के लिए। और क्या-क्या खेल ? सब चीजों का खेल। कौन-सी ऐसी चीज है जिसके साथ नहीं खेल सकते — पानी है उसके साथ खेल सकते हैं, नलका है उसके साथ खेल सकते हैं, जो चीज सामने आए। कुछ और नहीं आ रहा है, क्योंकि उस समय तो टीवी भी नहीं था हिंदुस्तान में। क्या देख रहे हैं ? चीटियों को देख रहे हैं, कहीं बादलों को देख रहे हैं, कहीं फूलों को देख रहे हैं।

बात यह नहीं है, बात यह है कि जो कुछ भी हम अपने परिवार के साथ करना चाहते हैं उन चीजों के बीज हमने किस प्रकार बोये हुए हैं उसी का फल हमको मिलेगा। हम अगर अपने दोस्तों के साथ हैं तो किस प्रकार के बीज हमने उन दोस्तों के साथ बोये। अच्छे बोये हैं उसका फल अच्छा मिलेगा। ख़राब बोये हैं उसका फल खराब मिलेगा। बीजों का तो यह कानून है। और कहावत भी है — “बोये पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय॥” जब कांटों वाली कोई चीज का बीज लगाया है तो फिर तुम आम की अपेक्षा अगर करो तो कैसे होगा ! लोग पूछते हैं ऐसा क्यों है, ऐसा क्यों है, ऐसा क्यों है ? पर ऐसा क्यों है ?

एक प्रश्न मेरे पास आया है कि “भगवान को किसने बनाया ?” मैंने भी सोचा! 8 साल का बच्चा पूछ रहा है कि “भगवान को किसने बनाया?” यह सवाल, यह सवाल बहुत बढ़िया सवाल है। और 8 साल के बच्चे की अगर यहां यह — खोपड़ी चल रही है और वह सोच रहा है “भगवान को किसने बनाया?” अब वह तो — अगर वह वीडियो गेम खेल रहा है सवेरे से लेकर शाम तक, तो वह क्या सोचेगा यह बात! परन्तु यही बातें हैं सोचने की — क्या है यह ? मैं किस संसार के अंदर रह रहा हूं ? क्या यह दुनिया है ? ऐसा क्यों है जो है ? जो कुछ भी मैं देख रहा हूं ऐसा क्यों है ? क्यों यह दुनिया ऐसी है ?

अगर इसका सवाल भी कोई पूछे तो लोग तो आजकल यही जवाब देंगे “ऐसी है।” और मैं कहता हूं कि “ऐसी क्यों है ?” “ऐसी क्यों है?” — अगर यह प्रश्न पहले ही मनुष्य पूछता कि यह ऐसी इसलिए है — उत्तर तो यही होगा इसका कि इसलिए है क्योंकि तुमने ऐसी बनाई है। यह तुम्हारी बनाई हुई है। यह भगवान की — यह दुनिया जो है, माया जिसे कहते हैं, जिसके अंदर तुम सवेरे से लेकर शाम तक अपनी नाक को रगड़ते रहते हो, यह भगवान की बनाई हुई नहीं है, यह मनुष्य की बनाई हुई है। भगवान ने मनुष्य को जरूर बनाया — दो हाथ दिये, दो आँखें दीं, कान, नाक, मुंह, खोपड़ी दी सोचने के लिए, दिमाग दिया सोचने के लिए, परंतु हाथों पर हथकड़ी नहीं लगाई। पैरों पर हथकड़ी नहीं लगाई — “जाना है तू जहां जा सकता है, उत्तर जाना है, तेरे को उत्तर जा, दक्षिण जाना है, दक्षिण जा, पूरब जाना है, पूरब जा। जहां जाना चाहता है तू, जिस दिशा में जाना चाहता है जा।” और तेरे अंदर हृदय भी है — मनुष्य के अंदर हृदय भी है, मन भी है, हृदय भी है। और उसके अंदर प्यास भी है; उसके अंदर पानी भी है। उसके अंदर अज्ञान भी है; उसके अंदर ज्ञान भी है। उसके अंदर अंधेरा भी है; उसके अंदर प्रकाश भी है। अब बात सिर्फ इतनी है कि मनुष्य किस चीज को पसंद कर रहा है ? किस चीज को चूज़ कर रहा है, किस चीज को ले रहा है — अंधेरे को या उजाले को ? अज्ञानता को या ज्ञान को ? अगर अज्ञानता को लेगा, तो उसका भी उसको फल मिलेगा। भटकना पड़ेगा उसको। चाहे बाहर वह न भटके अंदर तो भटक रहा है, अंदर तो भटक रहा है।

मैंने देखा है बड़े-बड़े लोग, बड़े-बड़े लोग — उनके नाम के आगे क्या-क्या नहीं लिखा हुआ है। और उनको सम्मान की इतनी जरूरत है कि पूछो मत! किसी ने किसी दूसरे को माला पहना दी, उनको नहीं पहनाई तो उनका अपमान हो गया। गुस्सा हो जाएंगे, एक माला के कारण। अरबपति लोगों को हमने देखा है कुछ गड़बड़ हो गयी, गरम हो गए, अपमान हो गया। एक माला की कीमत क्या है ? क्या-क्या — फूलों की माला, क्या कीमत है उसकी ? जो अरबपति है, जिसके पास अरबों-अरबों-अरबों-अरबों पैसे हैं, पर उसको अगर एक माला नहीं मिली, उसको सम्मानित नहीं किया गया, तो उसका अपमान हो जाता है। ऐसे बीज बोये हैं। क्योंकि वह अपने आपको सम्मानित नहीं कर सकता। जो अपना सम्मान अपने आप नहीं कर सकता दूसरे क्या करेंगे उसका सम्मान। दिखावा है सब दिखावा है। हम आपको सम्मानित करते हैं, हम यह करते हैं, हम वह करते हैं। हमारे साथ हुआ है यह।

एक बार मैं एक जगह आया, इंग्लैंड में थी वह जगह। तो जैसे ही हमारी कार वहां रुकी तो वहां काफी सारे लोग खड़े हुए थे।

उन्होंने कहा , “अरे! कार को हटाओ यहां से, हटाओ, हटाओ, हटाओ, जल्दी हटाओ!”

तो मैं उतर रहा था, मैंने कहा “भाई क्यों? क्यों हटाएं हम अपनी कार को यहां से?”

कहा — “जी! कोई आने वाला है। बहुत वीआईपी आने वाला है।”

मैंने कहा, “ठीक है ! कार को यहां से हटा देते हैं, पर हम उतर तो जाएं कम से कम।” तो हम उतर गए ।

तो उसने फिर देखा मेरी तरफ। मैंने सूट नहीं पहनी हुई थी। मैंने शर्ट पहनी हुई थी, बड़ा कैज़ुअल रूप में था, बड़ा आरामदायक कपड़े पहने हुए थे। मैं — 4 घंटे, 5 घंटे का रास्ता था तो कार से ही आया था।

उन्होंने कहा — “अरे! आप ही का इंतज़ार हो रहा था।”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं, कोई बात नहीं!”

फिर कहने लगे मेरे से सॉरी, सॉरी, सॉरी। मैंने कहा, कोई बात नहीं, तुम चिंता मत करो। वह तो मज़ाकिया बात है।

तो जो अपना ही सम्मान नहीं कर सकता और क्या करेंगे! अब उनको क्या — वह क्या देखना चाहते थे ? वह देखना चाहते थे — सूट। वह देखना चाहते थे — टाई।’ और टाई मैंने पहनी हुई नहीं थी, तो मैं टाई हूँ, मैं सूट हूँ ? नहीं!

आप अपने जीवन में अपना सम्मान कीजिये। और यह जो समय है यह आपके जीवन का समय है, यह आपके जीवन का समय है और इसका पूरा-पूरा फायदा आप उठाइए।

सभी श्रोताओं को मेरा नमस्कार!